
Dr. Maheshkumar K. Metra
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भगवान् श्रीसोमनाथ के सान्निध्य में प्रस्थापित एवं नित्य उनके अनुग्रह से परिपोषित और "पूर्णता गौरवाय” इस गुणवत्तायुक्त ध्येयवाक्य को केन्द्र में रखकर अपने प्रगतिपथ पर नित्य अग्रसर हो रहा यह थी सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय गुजरात की इस पावन प्रभासक्षेत्र की भूमि पर शिवजी के मस्तक पर चन्द्रमा की भाँति शोभित हो रहा है। साथ ही विश्वविद्यालय का यह भी सिद्धान्त है कि “गुणवत्ता काचिद् यात्रा न तु गन्तव्यस्थानम्” अर्थात् गुणवत्ता केवल यात्रा है, गन्तव्यस्थान नहीं। अतः विश्वविद्यालय अपनी गुणवत्तापूर्ण यात्रा में साफल्य प्राप्त करता हुआ और अपनी २० वर्षों की यात्रा को ध्यान में रखकर शैक्षणिक वर्ष- २०२५-२६ को छात्रोत्कर्ष वर्ष के रूप में मना रहा है और छात्रकेन्द्रित विभिन्न शास्त्रीय, शैक्षिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक आदि उपक्रमों का आयोजनविश्वविद्यालय के द्वारा किया जा रहा है।